210502 : The Magic Number
वैसे तो भाग्य या 'किस्मत' जैसे शब्द को किसी एक परिभाषा में नहीं बाँधा जा सकता। कहने वाले अक्सर कह देते हैं कि जो परम-शक्ति ने लिख दिया है, वही होना है; आपके हाथ-पैर मारने से कुछ बदलने वाला नहीं। जैसा कि कबीर दास जी की उलटबांसी या साखियों का भाव हमें समझाता है: "चिंता ताकी कीजिए, जो अनहोनी होय। अनहोनी होनी नहीं, होनी होय सो होय॥" इसके ठीक उलट एक दूसरा पक्ष भी है—जो किसी अदृश्य शक्ति या लकीरों में बिल्कुल यकीन नहीं रखता। जिसका मानना है कि यह समूचा संसार एक 'रैंडम' सिलसिले पर चल रहा है; यहाँ किसी अलौकिक शक्ति का कोई हस्तक्षेप नहीं। यह वह तबका है जो केवल और केवल श्रम को पूजता है और फ़िराक़ गोरखपुरी के इस अंदाज़ में जीता है: "हमसे पूछो ज़ब्त-ए-इश्क़ की बातें, हमने तक़दीर को तदबीर से बदलते देखा है।" लेकिन विश्वास, आस्था, अंधविश्वास, कर्म और 'हाथ की लकीरों' की इस अंतहीन बहस को अगर थोड़ी देर के लिए दरकिनार कर दें, तो एक ऐसा कड़वा गुणांक (Factor) सामने आता है जिस पर हमारा ज़ोर नहीं चलता— हमारा पिन-कोड (PIN-Code)। साधारण शब्दों में कहें तो हम...